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Reedh Ki Haddi Chapter 3 Summary

Reedh Ki Haddi Chapter 3 Summary, Explanation & Question Answers

Class 9TH Hindi Kritika Part 1

हैलो बच्चों!

अज हम कक्षा 9वीं की पाठ्यपुस्तक

कृतिका भाग-1 का पाठ पढ़ेंगे

“रीढ़ की हड्डी”

Reedh Ki Haddi

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पाठ के लेखक जगदीष चंद्र माथुर हैं।

आइए बच्चो, पाठ के सार को सरल शब्दों में समझते हैं।

“’रीढ़ की हड्डी“ के लेखक जगदीश चंद्र माथुर जी हैं। यह एक एकांकी (छोटा नाटक) हैं। जो शादी ब्याह तय करने से पहले “लड़की दिखाने की”  सामाजिक समस्या पर आधारित हैं।

लेखक ने इस नाटक के माध्यम से यह बताने की कोशिश की है कि हम चाहे कितना भी पढ़-लिख जाय, कितने भी आधुनिक क्यों ना हो जाए, लेकिन महिलाओं के प्रति हमारी सोच नही बदली है। और न ही हम अपनी संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठ पाए हैं। लेखक ने इस पाठ के माध्यम से स्त्री शिक्षा के महत्व को भी समझाया हैं।

हमारे समाज में विवाह जैसी पवित्र परम्परा का भी व्यवसायीकरण हो गया है। लोग शादी विवाह के वक्त लड़की के माता-पिता से दहेज के रूप में धन, वाहन और अन्य घरेलू वस्तुओं को मांगने में जरा भी नहीं हिचकते हैं। पता नहीं उनको ऐसा क्यों लगता है कि जैसे वो अपने लड़के की शादी उस लड़की से कर उसके माता-पिता पर एहसान कर रहे हैं।

लाख बुराइयों के बाद भी लड़के को खरा सोना और सर्वगुण संपन्न व पढ़ी-लिखी होने के बावजूद भी लड़की को कमतर ही आँका जाता है। दहेज समस्या की वजह से ही आज हमारे देश कन्या भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध बढ़ रहे हैं।

इस कहानी में लेखक ने भी बस यही समझाने की कोशिश की है।

“’रीढ़ की हड्डी” कहानी की शुरुआत कुछ इस तरह से होती हैं। उमा एक पढ़ीलिखी शादी के योग्य लड़की हैं जिसके पिता रामस्वरूप उसकी शादी के लिए चिंतित हैं। और आज उनके घर लड़के वाले (यानि बाबू गोपाल प्रसाद जो पेशे से वकील हैं और उनका लड़का शंकर जो बीएससी करने के बाद मेडिकल की पढाई कर रहा हैं।) उमा को देखने आ रहे हैं।

चूंकि रामस्वरूप की बेटी उमा को देखने के लिए आज लड़के वाले आ रहे हैं। इसीलिए रामस्वरूप अपने नौकर रतन के साथ अपने घर के बैठक वाले कमरे को सजा रहे हैं। उन्होंने बैठक में एक तख्त (चारपाई) रख कर उसमें एक नया चादर बिछाया। फिर उमा के कमरे से हारमोनियम और सितार ला कर उसके ऊपर सजा दिया।

रामस्वरूप जमीन में एक नई दरी और टेबल में नया मेजपोश बिछाकर उसके ऊपर गुलदस्ते सजाकर कमरे को आकर्षक रूप देने की कोशिश करते हैं। तभी रामस्वरूप की पत्नी प्रेमा आकर कहती है कि उमा मुंह फुला कर (नाराज होना) बैठी है। इस पर रामस्वरूप अपनी पत्नी प्रेमा से कहते हैं कि वह उमा को समझाएं क्योंकि बड़ी मुश्किल से उन्हें एक रिश्ता मिला है। इसलिए वह अच्छे से तैयार होकर लड़के वालों के सामने आए।

Reedh Ki Haddi

दरअसल उमा के पिता किसी भी कीमत पर इस रिश्ते को हाथ से नहीं जाने देना चाहते हैं। लेकिन प्रेमा कहती है कि उसने उमा को बहुत समझाया है लेकिन वह मान नहीं रही हैं।

उसके बाद वह रामस्वरूप पर दोषरोपण करते हुए कहती हैं कि यह सब तुम्हारे ज्यादा पढ़ाने लिखाने का नतीजा है। अगर उमा को सिर्फ बारहवीं तक ही पढ़ाया होता तो, आज वह कंट्रोल में रहती। रामस्वरूप अपनी पत्नी प्रेमा से कहते हैं कि वह उमा की शिक्षा की सच्चाई लड़के वालों को न बताये।

दरअसल उमा बी.ए. पास है। और लड़के वालों को ज्यादा पढ़ी लिखी लड़की नहीं चाहिए। इसीलिए रामस्वरूप ने लड़के वालों से झूठ बोला हैं कि लड़की सिर्फ दसवीं पास है।

प्रेमा की बातें सुनकर रामस्वरूप थोड़ा चिंतित होते हैं क्योंकि वो जानते हैं कि आजकल शादी ब्याह के वक्त लड़की के साज श्रृंगार का क्या महत्व है। लेकिन वह अपनी पत्नी से कहते हैं कि कोई बात नहीं, वह वैसे ही सुंदर हैं।

लड़के वालों के नाश्ते के लिए मिठाई, नमकीन, फल, चाय, टोस्ट का प्रबंध किया गया है। लेकिन टोस्ट में लगाने के लिए मक्खन खत्म हो चुका है। इसीलिए रामस्वरूप अपने नौकर को मक्खन लेने के लिए बाजार भेजते हैं। बाजार जाते वक्त नौकर को घर की तरफ आते मेहमान दिख जाते हैं जिनकी खबर वह अपने मालिक को देता हैं।

ठीक उसी समय बाबू गोपाल प्रसाद अपने लड़के शंकर के साथ रामस्वरूप के घर में दाखिल होते हैं। लेकिन गोपाल प्रसाद की आंखों में चतुराई साफ झलकती हैं। और आवाज से ही वो, बेहद अनुभवी और फितरती इंसान दिखाई देते हैं। उनके लड़के शंकर की आवाज एकदम पतली और खिसियाहट भरी हैं जबकि उसकी कमर झुकी हुई हैं। रामस्वरूप ने मेहमानों का स्वागत किया और औपचारिक बातें शुरू कर दी। बातों-बातों में दोनों नये जमाने और अपने जमाने (समय) की तुलना करने लगते हैं।

थोड़ी देर बाद रामस्वरूप चाय नाश्ता लेने अंदर जाते हैं। रामस्वरूप के अंदर जाते ही गोपाल बाबू रामस्वरूप की हैसियत आंकने की कोशिश करने लगते हैं। वह अपने बेटे को भी डांटते हैं जो इधर-उधर झाँक रहा था। वह उससे सीधी कमर कर बैठने को कहते हैं।

इतने में रामस्वरूप दोनों के लिए चाय नाश्ता ले कर आते हैं। थोड़ी देर बात करने के बाद बाबू गोपाल प्रसाद असल मुद्दे यानि शादी विवाह के बारे में बात करना शुरू कर देते हैं।

जन्मपत्रिका मिलाने की बात पर गोपाल प्रसाद कहते हैं कि उन्होंने दोनों जन्मपत्रिकाओं को भगवान के चरणों में रख दिया। बातों-बातों में वो अपनी संकीर्ण मानसिकता का परिचय देते हुए कहते हैं कि लोग उनसे कहते हैं कि उन्होंने लड़कों को उच्च शिक्षा दी हैं। इसीलिए उन्हें बहुएं भी ग्रेजुएट लानी चाहिए।

लेकिन मैं उनको कहता हूँ कि लड़कों का पढ़-लिख कर काबिल होना तो ठीक है लेकिन लड़कियां अगर ज्यादा पढ़ लिख जाए और अंग्रेजी अखबार पढ़कर पाॅलिटिक्स करने लग जाए तो, घर गृहस्थी कैसे चलेगी। वो आगे कहते हैं कि मुझे बहुओं से नौकरी नहीं करानी है।

फिर वो रामस्वरूप से लड़की (उमा) की सुंदरता व अन्य चीजों के बारे में पूछते हैं। रामस्वरूप कहते हैं कि आप खुद ही देख लीजिए।

इसके बाद रामस्वरूप उमा को बुलाते है। उमा एक प्लेट में पान लेकर आती है। उमा की आँख पर लगे चश्मे को देखकर गोपाल प्रसाद और शंकर दोनों एक साथ चश्मे के बारे में पूछते हैं। लेकिन रामस्वरूप झूठा कारण बता कर उन्हें संतुष्ट कर देते हैं।

गोपाल प्रसाद उमा से गाने बजाने के संबंध में पूछते हैं तो उमा मीरा का एक सुंदर गीत गाती है। उसके बाद वो पेंटिग, सिलाई, कढ़ाई आदि के बारे में भी पूछते हैं। उमा को यह सब अच्छा नहीं लगता है। इसलिए वह कोई उत्तर नहीं देती है। यह बात गोपाल प्रसाद को खटकती हैं। वो उमा से प्रश्नों के जवाब देने को कहते हैं। रामस्वरूप भी उमा से जवाब देने के लिए कहते हैं।

तब उमा अपनी धीमी मगर मजबूत आवाज में कहती है कि क्या दुकान में मेज-कुर्सी बेचते वक्त उनकी पसंद-नापसंद पूछी जाती है। दुकानदार ग्राहक को सीधे कुर्सी मेज दिखा देता है और मोल भाव तय करने लग जाता है। ठीक उसी तरह ये महाशय भी, किसी खरीददार के जैसे मुझे एक सामान की तरह देख-परख रहे हैं। रामस्वरूप उसे टोकते हैं और गोपाल प्रसाद नाराज होने लगते हैं।

लेकिन उमा अपनी बात जारी रखते हुए कहती हैं कि पिताजी आप मुझे कहने दीजिए। ये जो सज्जन मुझे खरीदने आये हैं जरा उनसे पूछिए क्या लड़कियां के दिल नहीं होते हैं, क्या उन्हें चोट नहीं लगती है। गोपाल प्रसाद गुस्से में आ जाते हैं और कहते हैं कि क्या उन्हें यहाँ बेइज्जती करने के लिए बुलाया हैं।

उमा जवाब देते हुए कहती हैं कि आप इतनी देर से मेरे बारे में इतनी जांच पड़ताल कर रहे हैं। क्या यह हमारी बेइज्जती नहीं हैं। साथ में ही वह लड़कियों की तुलना बेबस भेड़ बकरियों से करते हुए कहती है कि उन्हें शादी से पहले ऐसे जांचा परखा जाता हैं जैसे कोई कसाई भेड़-बकरियों खरीदने से पहले उन्हें अच्छी तरह से जाँचता परखता हैं।

वह उनके लड़के शंकर के बारे में बताती हैं कि किस तरह पिछली फरवरी में उसे लड़कियों के हॉस्टल से बेइज्जत कर भगाया गया था। तब गोपाल प्रसाद आश्चर्य से पूछते हैं क्या तुम कॉलेज में पढ़ी हो। उमा जवाब देते हुए कहती हैं कि उसने बी.ए पास किया है। ऐसा कर उसने कोई चोरी नहीं की। उसने पढ़ाई करते हुए अपनी मर्यादा का पूरा ध्यान रखा। उनके पुत्र की तरह कोई आवारागर्दी नहीं की।

अब शंकर व उसके पिता दोनों गुस्से में खड़े हो जाते हैं और रामस्वरूप को भला बुरा कहते हुए दरवाजे की ओर बढ़ते हैं। उमा पीछे से कहती है। जाइए… जाइए, मगर घर जाकर यह पता अवश्य कर लेना कि आपके पुत्र की रीढ़ की हड्डी है भी कि नहीं।

गोपाल प्रसाद और शंकर वहां से चले जाते हैं। उनको जाता देख रामस्वरूप निराश हो जाते हैं। पिता को निराश-हताश देख उमा अपने कमरे में जाकर रोने लग जाती हैं। तभी नौकर मक्खन लेकर आता हैं। और कहानी खत्म हो जाती हैं।

IMPORTANT QUESTION ANSWERS

REEDH KI HADDI CHAPTER 3 HINDI KRITIKA PART 1

प्रश्न 1. रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद बात-बात पर “एक हमारा ज़माना था” कहकर अपने समय की तुलना वर्तमान समय से करते हैं। इस प्रकार की तुलना करना कहाँ तक तर्कसंगत है?

उत्तर: यह मनुष्य का स्वाभाविक गुण है कि वह अपने बीते हुए समय को याद करता है तथा उसे ही सही ठहरा था है परंतु बीते हुए समय की तुलना वर्तमान से करना तर्कसंगत नहीं है क्योंकि हर एक समय अपनी उस समय की परिस्थितियों के अनुसार सही होता है यूं भी हर जमाने की अपनी स्थितियां होती है जमाना बदलता है तो कुछ कमियों के साथ सुधार भी आते हैं।

प्रश्न 2. रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना और विवाह के लिए छिपाना, यह विरोधाभास उनकी किस विवशता को उजागर करता है?

उत्तर: आधुनिक समाज में सभ्य नागरिक होने के बावजूद उन्हें अपनी बेटी के भविष्य की खातिर लोगों के दबाव में झुकना पड़ रहा था, उपयुक्त बात उनकी इसी विवशता को उजागर करती है।

प्रश्न 3. अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं, वह उचित क्यों नहीं है?

उत्तर: अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप, उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं वह सरासर गलत है एक तो वे अपनी पढ़ी-लिखी लड़की को कम पढ़ा लिखा साबित कर रहे हैं और उसकी सुंदरता को और बढ़ाने के लिए नकली प्रसाधन सामग्री का उपयोग करने के लिए कहते हैं जो अनुचित है साथ ही वे यह भी चाहते हैं कि उमा वैसा ही आचरण करें जैसा लड़के वाले चाहते हैं परंतु वह यह क्यों भूल रहे हैं कि उन्हें लड़की की पसंद-नापसंद का भी ख्याल रखना चाहिए क्योंकि आज समाज में लड़का तथा लड़की को समान दर्जा प्राप्त है।

प्रश्न 4. गोपाल प्रसाद विवाह को ‘बिजनेस’ मानते हैं और रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा झिपाते हैं। क्या आप मानते हैं कि दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं? अपने विचार लिखें।

उत्तर: मेरे विचार से दोनों ही समान रूप से अपराधी है गोपाल प्रसाद विवाह जैसे पवित्र बंधन में भी व्यापार खोज रहे हैं वह इस तरह के आचरण से इस संबंध की मधुरता तथा संबंधों की गरिमा को भी कम कर रहे हैं रामस्वरूप जहां आधुनिक सोच वाले व्यक्ति होने के बावजूद कायरता का परिचय दे रहे हैं वे चाहते तो अपनी बेटी के साथ मजबूती से खड़े होते और एक स्वाभिमानी वर की तलाश करते ना की मजबूरी में आकर परिस्थिति से समझौता करते।

प्रश्न 5. “…आपके लाड़ले बेटे की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं…” उमा इस कथन के माध्यम से शंकर की किन कमियों की ओर संकेत करना चाहती है ?

उत्तर: उपर्युक्त कथन के माध्यम से उमा, शंकर की निम्न कमियों की ओर ध्यान दिलाना चाहती है:

  1. शंकर का चरित्र अच्छा नहीं है लड़कियों के हॉस्टल के चक्कर काटते हुए वह पकड़ा जा चुका है।
  2. उसका अपना निजी कोई व्यक्तित्व नहीं है वह अपने पिता के पीछे चलने वाला बेचारा जीव है जैसा कहा जाता है वैसा ही करता है।
  3. वह शारीरिक रूप से भी असमर्थ है वह शरीर में कमजोर झुक कर तथा उसे चेतन कर भी बैठा नहीं जाता।

प्रश्न 6. शंकर जैसे लड़के या उमा जैसी लड़की समाज को कैसे व्यक्तित्व की ज़रूरत है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर: समाज में आज उमा जैसे व्यक्तित्व, स्पष्टता वादी तथा उच्च चरित्र वाली लड़की की ही आवश्यकता है ऐसी लड़कियों से ही समाज और देश प्रगति कर पाएगा जो आत्मविश्वास से भरी तथा निडर हो इसके विपरीत शंकर जैसे लड़के समाज को दिशा नहीं प्रदान कर सकते हैं।

प्रश्न 7. ‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जिस प्रकार मानव में रीढ़ की हड्डी महत्वपूर्ण मानी जाती है ठीक उसी प्रकार वैवाहिक रिश्तो में लड़का और लड़की रीड की हड्डी के समान होते हैं उनके स्वस्थ रिश्ते पारिवारिक शांति अपनापन और समृद्धि के कारण बनते हैं इस पाठ के जरिए यही बताने का प्रयास किया गया है कि नर और नारी को कमतर समझकर हम एक प्रगतिशील समाज की कल्पना नहीं कर सकते अतः यह उचित शीर्षक है।

प्रश्न 8. कई वस्तु के आधार पर आप किसे एकांकी का मुख्य पात्र मानते हैं और क्यों ?

उत्तर: इस कहानी में कई पात्र हैं परंतु सबसे सशक्त पात्र बनकर जो उभरता है वह ओ माही है उमा की उपस्थिति भले थोड़े समय के लिए थी परंतु उसके विचारों से प्रभावित हुए बिना हम नहीं रह पाते हैं वह हमें बहुत कुछ सोचने के लिए मजबूर करती है उसकी उपस्थिति नारी समाज को एक नई सोच और दिशा प्रदान करती है।

प्रश्न 9. एकांकी के आधार पर रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: रामस्वरूप आधुनिक और प्रगतिशील विचारधाराओं से संपन्न है परंतु एक मजबूर पीता है वह एक तरफ तो स्त्री शिक्षा के समर्थक हैं परंतु बेटी के विवाह के समय यह शिक्षा में छिपाने का प्रयास करते हैं जिससे उनकी विवशता तथा कायरता झलकती है रामगोपाल निहायती बड़े वाले लालची और पढ़े लिखे होने के बावजूद स्त्री पुरुष की संपन्नता में विश्वास रखने वाले व्यक्ति के रूप में उभरते हैं इसी कारणवश वह अपने मेडिकल में पढ़ने वाले बेटे का विवाह जैसे पवित्र रिश्ते को भी बिजनेस मानते हैं इससे उनका लालची स्वभाव पता चलता है।

प्रश्न 10. इस एकांकी का क्या उद्देश्य है? लिखिए।

उत्तर: रीढ़ की हड्डी एक उद्देश्य पूर्ण एकांकी है इस एकांकी के उद्देश्य निम्नलिखित है:

  1. यह एकांकी स्त्री पुरुष समानता की पक्षधर है।
  2. लड़कियों के विवाह में आने वाली समस्याओं को समाज के सामने लाने वाली है।
  3. बेटियों के विवाह के समय पिता की परेशानियों को बेनकाब करती है।
  4. स्त्री शिक्षा के प्रति दोहरी मानसिकता रखने वाले को बेनकाब करती है।
  5. स्त्री को भी अपने विचार व्यक्त करने की आजादी देने के पक्ष में है।


तो बच्चों!

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