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Chhaya Mat Chhuna

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हैलो बच्चों!

आज हम कक्षा 10वीं की पाठ्यपुस्तक

क्षितिज भाग-2 की कविता पढ़ेंगे

‘‘छाया मत छूना’’

कविता के रचयिता गिरिजा कुमार माथुर हैं।

बच्चो कविता के भावार्थ को समझने से पहले कवि का जीवन परिचय जानते हैं।

कवि गिरिजाकुमार माथुर

जीवन परिचयः गिरिजा कुमार माथुर का जन्म ग्वालियर जिले के अशोक नगर कस्बे में 22 अगस्त सन् 1918 में हुआ था। वे एक कवि, नाटककार और समालोचक के रूप में जाने जाते हैं। गिरिजाकुमार की प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई। उनके पिता ने घर में ही उन्हें अंग्रेजी, इतिहास, भूगोल आदि पढाया। स्थानीय कॉलेज से इण्टरमीडिएट करने के बाद वे 1936 में स्नातक उपाधि के लिए ग्वालियर चले गये। 1938 में उन्होंने बी.ए. किया, 1941 में उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में एम.ए. किया तथा वकालत की परीक्षा भी पास की। सन 1940 में उनका विवाह दिल्ली में कवयित्री शकुन्त माथुर से हुआ। शुरुआत में उन्होंने वकालत की, परन्तु बाद में उन्होंने आकाशवाणी एवं दूरदर्शन में नौकरी की।

काव्य रचनाएँ :- गिरिजाकुमार माथुर जी की प्रमुख काव्य- रचनाएँ निम्नलिखित हैं –

नाश और निर्माण,  धूप के धान, शिलापंख चमकीले, भीतरी नदी की यात्रा इत्यादि। 1991 में कविता-संग्रह ‘‘मैं वक्त के सामने’’ के लिए उन्हें हिंदी के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

छाया मत छूना कविता का सारः- प्रस्तुत कविता ‘‘छाया मत छूना’’  में कवि गिरिजाकुमार माथुर जी ने हमें यह संदेश देने की कोशिश की है कि हमें अपने अतीत के सुखों को याद कर अपने वर्तमान के दुःख को और गहरा नहीं करना चाहिए। अर्थात व्यक्ति को अपने अतीत की यादों में डूबे न रहकर, अपनी वर्तमान स्थिति का डट कर सामना करना चाहिए और अपने भविष्य को उज्जवल बनाना चाहिए। कवि हमें यह बताना चाहता है कि इस जीवन में सुख और दुःख दोनों ही हमें सहन करने पड़ेंगे। अगर हम दुःख से व्याकुल होकर अपने अतीत में बिताए हुए सुंदर दिन या सुखों को याद करते रहेंगे, तो हमारा दुःख कम होने की बजाय और बढ़ जाएगा। हमारा भविष्य भी अंधकारमय हो जाएगा। इसलिए हमें अपने वर्तमान में आने वाले दुखों को सहन करके, अपने भविष्य को उज्जवल बनाने का प्रयास करना चाहिए।

छाया मत छूना (कविता)

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी

छवियों की चित्र-गंध फैली मनभावनीय

तन-सुगंध शेष रही, बीत गई यामिनी,

कुंतल के फूलों की याद बनी चाँदनी।

भूली सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण-

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

भावार्थ :- प्रस्तुत पंक्तियों में कवि छाया मत छूना अर्थात अतीत की पुरानी यादों में जीने के लिए मना कर रहा है। कवि के अनुसार, जब हम अपने अतीत के बीते हुए सुनहरे पलों को याद करते हैं, तो वे हमें बहुत प्यारे लगते हैं, परन्तु जैसे ही हम यादों को भूलकर वर्तमान में वापस आते हैं, तो हमें उनके अभाव का ज्ञान होता है। इस तरह हृदय में छुपे हुए घाव फिर से हरे हो जाते हैं और हमारा दुःख बढ़ जाता है।

प्रस्तुत पंक्तियों में कवि अपने पुराने मीठे पलों को याद कर रहा है। ये सारी यादें उनके सामने रंग-बिरंगी छवियों की तरह प्रकट हो रही हैं, जिनके साथ उनकी सुगंध भी है। कवि को अपने प्रिय के तन की सुगंध भी महसूस होती है। यह चांदनी रात का चंद्रमा कवि को अपने प्रिय के बालों में लगे फूल की याद दिला रहा है। इस प्रकार हर जीवित क्षण जो हम जी रहे हैं, वह पुरानी यादों रूपी छवि में बदलता जाता है। जिसे याद करके हमें केवल दुःख ही प्राप्त हो सकता है, इसलिए कवि कहते हैं छाया मत छूना, होगा दुःख दूना।

यश है या न वैभव है, मान है न सरमायाय

जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया।

प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,

हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।

जो है यथार्थ कठिन उसका तू कर पूजन-

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

भावार्थ :- इन पंक्तियों में कवि हमें यह सन्देश देना चाहते हैं कि इस संसार में धन, ख्याति, मान, सम्मान इत्यादि के पीछे भागना व्यर्थ है। यह सब एक भ्रम की तरह हैं।

कवि का मानना यह है कि हम अपने जीवन-काल में धन, यश, ख्याति इन सब के पीछे भागते रहते हैं और खुद को बड़ा और मशहूर समझते हैं। लेकिन जैसे हर चांदनी रात के बाद एक काली रात आती है, उसी तरह सुख के बाद दुःख भी आता है। कवि ने इन सारी भावनाओं को छाया बताया है। हमें यह संदेश दिया है कि इन छायाओं के पीछे भागने में अपना समय व्यर्थ करने से अच्छा है, हम वास्तविक जीवन की कठोर सच्चाइयों का सामना डट कर करें। यदि हम वास्तविक जीवन की कठिनाइयों से रूबरू होकर चलेंगे, तो हमें इन छायाओं के दूर चले जाने से दुःख का सामना नहीं करना पड़ेगा। अगर हम धन, वैभव, सुख-समृद्धि इत्यादि के पीछे भागते रहेंगे, तो इनके चले जाने से हमारा दुःख और बढ़ जाएगा।

दुविधा-हत साहस है, दिखता है पंथ नहीं,

देह सुखी हो पर मन के दुख का अंत नहीं।

दुख है न चाँद खिला शरद-रात आने पर,

क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?

जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण,

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

भावार्थ :- कवि कहता है कि आज के इस युग में मनुष्य अपने कर्म पथ पर चलते-चलते जब रास्ता भटक जाता है और उसे जब आगे का रास्ता दिखाई नहीं देता, तो वह अपना साहस खो बैठता है। कवि का मानना है कि इंसान को कितनी भी सुख-सुविधाएं मिल जाएं वह कभी खुश नहीं रह सकता, अर्थात वह बाहर से तो सुखी दिखता है, पर उसका मन किसी ना किसी कारण से दुखी हो जाता है। कवि के अनुसार, हमारा शरीर कितना भी सुखी हो, परन्तु हमारी आत्मा के दुखों की कोई सीमा नहीं है। हम तो किसी भी छोटी-सी बात पर खुद को दुखी कर के बैठ जाते हैं। फिर चाहे वो शरद ऋतू के आने पर चाँद का ना खिलना हो या फिर वसंत ऋतू के चले जाने पर फूलों का खिलना हो। हम इन सब चीजों के विलाप में खुद को दुखी कर बैठते हैं।

इसलिए कवि ने हमें यह संदेश दिया है कि जो चीज हमें ना मिले या फिर जो चीज हमारे बस में न हो, उसके लिए खुद को दुखी करके चुपचाप बैठे रहना, कोई समाधान नहीं हैं, बल्कि हमें यथार्थ की कठिन परिस्थितियों का डट कर सामना करना चाहिए एवं एक उज्जवल भविष्य की कल्पना करनी चाहिए।

Chhaya Mat Chhuna Question & Answers

प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों कही है?

त्तरः कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात इसलिए कहीं है क्योंकि हर किसी को अपने जीवन में एक कठोर सत्य को सुनना और अपनाना पड़ता है। यहां कवि ये स्वीकार करने को कहते है कि, आज के समय के विषम परिस्थितियों से बचकर कहीं नहीं भागा जा सकता।

प्रश्न 2. भाव स्पष्ट कीजिए-

प्रभुता का शरणदृबिंब केवल मृगतृष्णा है,

हर चंद्रिका में एक रात कृष्णा है।

उत्तरः इस पंक्तियों में कवि गिरिजाकुमार माथुर जी के कहने का मतलब यह है कि मनुष्य अपने सुखदृसमृद्धि मानदृसम्मान और धनदृदौलत आदि के सुख को पूरा करने में लगा है, सुख केवल कुछ समय के लिए है, वैसे ही जैसे एक रेगिस्तान में एक प्यासे को पानी की आस में सूर्य की रेट में पड़ी चमक को पानी मान लेता है लेकिन उसके पास पहुंचने पर उसे धोखा ही होता है। इसलिए कभी कहते हैं वास्तविकता को प्रसन्नता से स्वीकार करो और अपने अतीत के सुख को याद करके भ्रम में मत पढ़ो अन्यथा दुख और अधिक बढ़ जाएगा।

प्रश्न 3. ‘छाया’ शब्द यहां किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है? कवि ने उसे छूने के लिए मना क्यों किया है?

उत्तरः यहां छाया सुख से भरे अतीत की यादों के प्रतिक के रूप में प्रयुक्त हुआ है।

यहां कवि ने छाया को छूने के लिए मना इसलिए किया है क्योंकि बीते समय के सुखदृसमृद्धि क्षणों को याद करने पर वर्तमान के दुःख और भी बढ़ जाते हैं।

प्रश्न 4. कविता में विशेषण के प्रयोग से शब्दों के अर्थ में विशेष प्रभाव पड़ता है, जैसे कठिन यथार्थ। कविता में आए ऐसे अन्य उदाहरण छांट कर लिखिए और यह भी लिखिए कि इससे शब्दों के अर्थ में क्या विशेष्टता पैदा हुई है?

उत्तरः १. एक रात कृष्णादृ यहां एक रात (कृष्णा)- यह शब्द रात की काली प्रतिमा यानी अंधकार को दर्शाता है।

२. सुरंग सुधिया- (सुहावनी) – यहां यादो को रंग बिरंगी और मन को मोह देने वाले रूप में प्रस्तुत किया गया है।

३. शरद-रात – वो राते, जो सर्दी से भरी होती है।

४. दुधिया-हत- (साहस)- साहस टूटता दिखाई देना।

प्रश्न 5. मृगतृष्णा किसे कहते हैं? कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?

उत्तरः जब जेष्ठ के महीने में रेगिस्तान में कड़कती धूप की तिरछी किरणें रेगिस्तान की रेत या कहीं दूर सड़कों पर पड़ती है, तब वहां पानी के होने का एहसास होता है लेकिन पास आने पर पता चलता है कि वहां कुछ नहीं है, इस छल कि स्थिति को मृगतृष्णा कहते हैं। यह शब्द कीर्तिदृप्राप्त, सुखदृसमृद्धि, धनदृदौलत और इज्जतदृसम्मान आदि के अर्थ के लिए हुआ है।

प्रश्न 6. ‘बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधिले’ यह भाव कविता की किस पंक्ति में झलकता है?

उत्तरः ‘बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधिले’ यह भाव कविता के निम्नलिखित पंक्ति मे झलकता हैरूः-

‘क्या हुआ जो खिला फूल रसदृबसंत जाने पर?

जो ना मिला भूल उसे कर तू भविष्य वर्ण’

प्रश्न 7. कविता में व्यक्त दुख के कारणों को स्पष्ट कीजिए।

उत्तरः ‘‘छाया मत छूना’’ कविता में कवि ने मनुष्य की हरदम कुछ ना कुछ पाने की इच्छा को ही दुख का मूल कारण माना है। मनुष्य मन में उत्पन्न कामनाओं-लालसाओं की पूर्ति के लिए हरदम कड़ी मेहनत रहता है और जब उसे उनसे तृप्ति नहीं मिलती तो दुख को छोड़ के उसे कुछ भी प्राप्त नहीं होता। जैसे ठीक समय पर जो कार्य पहले सोच रखा हो उसके वैसे ना होने पर भी दुख होता है।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 8. ‘‘जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी’’, से कवि का अभिप्राय जीवन की मधुर स्मृतियों से है। आपने अपने जीवन की कौन-कौन सी स्मृतियाँ संजो रखी हैं?

उत्तरः विद्यार्थी स्वयं करें।

उदाहरण के लिएः मेरी जीवन की सबसे सुंदर याद वह है जब मुझे अपनी पहली पुस्तक मिली थी। वह पुस्तक बहुत ही सुंदर और रंग-बिरंगे चित्रों से भरी हुई थी। मैंने उसे अभी भी बहुत ही संभाल के रखा हुआ है क्योंकि वह मेरी पहली गुरु है। जिससे मैंने शब्द पढ़ना सीखा।

प्रश्न 9. ‘क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?’ कवि का मानना है कि समय बीत जाने पर भी उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है। क्या आप ऐसा मानते हैं? तर्क सहित लिखिए।

उत्तरः इस पंक्ति में कवि का मानना है कि समय बीत जाने पर भी उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है। लेकिन हमारे मत के अनुसार समय बीत जाने पर उपलब्धि उतना आनंद नहीं देती जितना की समय पर प्राप्त होकर देती। क्योंकि समय पर प्राप्त हुई उपलब्धि मन को संतुष्ट करती है और संतुष्ट मन में ईर्ष्या, द्वेष और निराशा उत्पन्न नहीं होती। समय पर मिलने वाली सफलता मन को उत्साहित करती है और भविष्य के प्रति आशावादी दृष्टिकोण को भी विकसित करती है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी

1. रंस-बसंत जीवन के किन दिनों का प्रतीक है?

(a) बुरे

(b) निराश

(c) सुहाने

(d) इनमें से कोई नहीं

Answer: (c) सुहाने

2. पुरानी मीठी यादों के साथ लगी सुहानी सुगंध कवि के तन-मन को क्या बना देती है?

(a) सुस्त

(b) चंचल

(c) मस्त

(d) रंगीन

Answer: (c) मस्त

3. उचित अवसर पर न मिलकर बाद में मिलने वाली ख़ुशी कैसी प्रतीत होती है?

(a) काल्पनिक

(b) व्यर्थ

(c) संतोषजनक

(d) निराशाजनक

Answer: (b) व्यर्थ

4. हर सुख में क्या छिपा रहता है?

(a) दुःख

(b) प्रेम

(c) दर्द

(d) याद

Answer: (a) दुःख

5. शरद रात किसका प्रतीक है?

(a) ठंड का

(b) खुशियों का

(c) धन का

(d) प्रेम का

Answer: (b) खुशियों का

6. कविता में मृगतृष्णा किसे कहा गया है?

(a) जल

(b) प्रभुता

(c) समृद्धि

(d) इनमें से कोई नहीं

Answer: (b) प्रभुता

7. चाँदनी रात को देखकर कवि को किसकी याद आती है?

(a) प्रेमिका के केशों में गूँथे फूल

(b) सांसारिक सुख

(c) माँ की

(d) इनमें से कोई नहीं

Answer: (a) प्रेमिका के केशों में गूँथे फूल

8. जब मनुष्य का मन दुविधाओं से भर जाता है तो क्या होता है?

(a) तब वह रोने लगता है|

(b) घर से भाग जाता है|

(c) वह लड़ने लगता है|

(d) तब उसे कोई रास्ता नहीं सूझता|

Answer: (d) तब उसे कोई रास्ता नहीं सूझता|

9.वसंत के समय फूल न खिलने का क्या आशय है?

(a) समय पर फूल का न खिलना

(b) सुख प्राप्त न होना

(c) सूखा पड़ना

(d) उचित अवसर का लाभ न मिलना

Answer: (d) उचित अवसर का लाभ न मिलना

10. कवि जीवन में क्या पाने के लिए दौड़ता रहा?

(a) यश

(b) धन

(c) ख़ुशी

(d) इनमें से कोई नहीं

Answer: (a) यश

तो बच्चो!

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