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Sangatkar Poem Summary Class 10

sangatkar poem summary class 10 hindi kshitij part 2 chapter 9 cover

हैलो बच्चों!

आज हम कक्षा 10वीं की पाठ्यपुस्तक

क्षितिज भाग-2 के काव्य खण्ड की कविता पढ़ेंगे

संगतकार’

Sangatkar Poem Class 10th Summary

कविता के रचयिता मंगेष डबराल हैं।

बच्चों, कविता के भावार्थ को समझने से पहले कवि का जीवन परिचय जानते हैं।

कवि परिचय- मंगलेश डबराल

समकालीन हिन्दी कवियों में सबसे चर्चित नाम है। इनका जन्म 16 मई 1948 को टिहरी गढ़वाल, उत्तराखण्ड के काफलपानी गाँव में हुआ था।  इनकी शिक्षा-दीक्षा देहरादून में हुई। मंगलेश डबराल के पाँच काव्य संग्रह प्रकाशित हुए हैं। पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, हम जो देखते हैं, आवाज भी एक जगह है और नये युग में शत्रु।

इनकी रचनाओं के लिए इन्हें कई पुरस्कारों, जैसे साहित्य अकादमी, कुमार विकल स्मृति पुरस्कार एवं दिल्ली हिन्दी अकादमी के साहित्यकार सम्मान से सम्मानित किया गया है। कविता के अतिरिक्त वे साहित्य, सिनेमा, संचार माध्यम और संस्कृति के विषयों पर भी लेखन करते हैं। उनका सौंदर्य-बोध सूक्ष्म है और भाषा पारदर्शी है।

संगतकार कविता के कवि मंगलेश डबराल जी हैं।

इस कविता में कवि कहते हैं कि किसी भी गीत को बनाते वक्त मुख्य गायक के साथ साथ अनेक लोग जैसे संगीतकार, गीतकार, अनेक वाद्य यंत्र वादक (जो वाद्य यंत्रों को बजाते हैं जैसे ढोलक, तबला, सितार आदि) अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संगतकार भी उन्हीं में से एक है जो मुख्य गायक के सुर में अपना सुर मिलाकर गाने को प्रभावशाली बनाने में मदद करता है।

और जब कभी मुख्य गायक अपनी सुर साधना में खो कर कही भटक जाता हैं और गीत के मुख्य सुरों को भूल जाता हैं तो उस समय यही संगतकार दुबारा मुख्य सुरों को पकड़ने में उसकी मदद करता हैं। यानि गाना गाते वक्त मुख्य गायक के साथ दृ साथ संगतकार की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। लेकिन ये लोग अक्सर गुमनाम ही रह जाते हैं।

संगतकार का भावार्थ

काव्यांश 1 .

मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी स्वर का साथ देती

वह आवाज सुंदर कमजोर कांपती हुई थी

वह मुख्य गायक का छोटा भाई है

या उसका शिष्य

या पैदल चलकर सीखने आने वाला दूर का कोई रिश्तेदार

मुख्य गायक की गरज में

वह अपनी गूँज मिलाता आया है प्राचीन काल से

भावार्थ : उपरोक्त पंक्तियों में कवि कहते हैं कि जब मुख्य गायक किसी संगीत सभा में अपना गायन प्रस्तुत कर रहा होता है तो उसकी भारी व गंभीर आवाज के साथ ही हमें संगतकार (मुख्य गायक का साथ देने वाला सह गायक) की एक सुंदर, मधुर मगर हल्की-हल्की आवाज सुनाई देती हैं।

कवि यहां पर अंदाजा लगा रहे हैं कि यह संगतकार मुख्य गायक का छोटा भाई भी हो सकता है या मुख्य गायक का शिष्य भी हो सकता है या फिर संगीत सीखने के लिए पैदल चलकर मुख्य गायक के पास आने वाला कोई उनका दूर का रिश्तेदार भी हो सकता है।

और सबसे खास बात यह हैं कि यह संगतकार जब से गायक ने गाना शुरू किया है तब से उसका साथ देना आया है। यानि शुरू से ही वह संगतकार मुख्य गायक की आवाज में अपनी आवाज मिलाकर उसके संगीत को और प्रभावशाली बनाता आया है।

काव्यांश 2.

गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में

खो चुका होता है

या अपने ही सरगम को लॉघकर

चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में

तब संगतकार ही स्थायी को संभाले रहता है

जैसे समेटता हो मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान

जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन

जब वह नौसिखिया था

भावार्थ : उपरोक्त पंक्तियों में कवि कहते हैं कि कभी दृ कभी मुख्य गायक किसी गाने का अंतरा गाने में इतना मगन (तल्लीन) हो जाता हैं कि वह अपने सुरों से ही भटक जाता हैं। यानि असली सुरों को भूल जाता हैं। ऐसी स्थिति में संगतकार , जो हमेशा मुख्य सुरों को पकड़े रहता है। वही उस समय सही सरगम को पकड़ने में मुख्य गायक की मदद कर उसे उस विकट स्थिति से बाहर लाता है।

यानि संगतकार हमेशा मूल स्वर को ही दोहराता रहता हैं। जब मुख्य गायक गीत गाते हुए सुरों की दुनिया में खो जाता हैं और अंतरे के सुर दृ तान की बारीकियों में उलझकर बिखरने लगता हैं। तब वह संगतकार के गाने को सुनकर वापस मुख्य सुर से जुड़ जाता हैं। अर्थात संगतकार, सुर से भटके हुए मुख्य गायक को वापस सुर पकड़ने में मदद करता हैं।

कवि आगे कहते हैं कि उस समय ऐसा लगता है मानो जैसे कि वह संगतकार मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान संमेटते हुए उसके साथ आगे बढ़ रहा है। उस समय उस मुख्य गायक को अपना बचपन याद आ जाता है जब वह नया दृ नया गाना सीखता था या नौसिखिया था।

काव्यांश 3.

तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला

प्रेरणा साथ छोड़ती हुई, उत्साह अस्त होता हुआ

आवाज से राख जैसा कुछ गिरता हुआ

तभी मुख्य गायक को ढाँढस बँधता

कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर

कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ

यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है

और यह कि फिर से गाया जा सकता है

गाया जा चुका राग

भावार्थ : उपरोक्त पंक्तियों में कवि कहते हैं कि जब कभी मुख्य गायक ऊंचे स्वर में गाता है तो उसका गला बैठने लगता है। उससे सुर सँभलते नहीं हैं। तब गायक को ऐसा लगने लगता है जैसे कि अब उससे आगे गाया नहीं जाएगा। उसके भीतर निराशा छाने लगती है। उसका मनोबल खत्म होने लगता है। उसकी आवाज कांपने लगती हैं जिससे उसके मन की निराशा व हताशा प्रकट होने लगती है।

उस समय मुख्य गायक को हौसला बढ़ाने वाला व उसके अंदर उत्साह जगाने वाला संगतकार का मधुर स्वर सुनाई देता हैं। उस सुंदर आवाज को सुनकर मुख्य गायक फिर नए जोश से गाने लगता हैं।

कवि आगे कहते हैं कि कभी दृ कभी संगतकार मुख्य गायक को यह बताने के लिए भी उसके स्वर में अपना स्वर मिलाता है कि वह अकेला नहीं है। कोई है जो उसका साथ हर वक्त देता है। और यह भी बताने के लिए कि जो राग या गाना एक बार गाया जा चुका है। उसे फिर से दोबारा गाया जा सकता है।

काव्यांश 4.

और उसकी आवाज में जो एक हिचक साफ सुनाई देती है

या अपने स्वर को ऊंचा उठाने की जो कोशिश है

उसे विफलता नहीं

उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

भावार्थ : उपरोक्त पंक्तियों में कवि कहते हैं कि जब भी संगतकार मुख्य गायक के स्वर में अपना स्वर मिलता है यानि उसके साथ गाना गाता है तो उसकी आवाज में एक हिचक साफ सुनाई देती है। और उसकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि उसकी आवाज मुख्य गायक की आवाज से धीमी रहे।

लेकिन हमें इसे संगतकार की कमजोरी या असफलता नही माननी चाहिए क्योंकि वह मुख्य गायक के प्रति अपना सम्मान प्रकट करने के लिए ऐसा करता है। यानि अपना स्वर ऊँचा कर वह मुख्य गायक के सम्मान को ठेस नही पहुंचाना चाहता है। यह उसका मानवीय गुण हैं।

Sangatkar Chapter Important Question & Answers

संगतकार (प्रश्नोत्तर)

  • प्रश्न 1. संगतकार के माध्यम से कवि किस प्रकार के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाह रहा है?

उत्तरः संगतकार के माध्यम से कवि उस तरह के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाह रहा है

जो महान और सफल व्यक्तियों की सफलता में परदे के पीछे रहकर अपना योगदान देते हैं। ये लोग महत्त्वपूर्ण योगदान तो देते हैं परंतु ये लोगों की निगाह में नहीं आ पाते हैं और सफलता के श्रेय से वंचित रह जाते हैं। मुख्य गायक की सफलता में साथी गायकों वाद्य कलाकारों, ध्वनि एवं प्रकाश व्यवस्था देखने वाले कलाकारों या कर्मियों का योगदान रहता है पर उन्हें इसका श्रेय नहीं मिल पाता है।

  • प्रश्न 2. संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा और किन-किन क्षेत्रों में दिखाई देते हैं?

उत्तरः संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा और भी बहुत से क्षेत्रों में होते हैं-

1. खेल में जीत का श्रेय कैप्टन को मिलता है जबकि विजेता बनाने में कई खिलाड़ियों का योगदान होता है। इसके अलावा उनके कोच और अन्य अनेक लोगों का योगदान होता है।

2. राजनीति के क्षेत्र में चुनाव में जीत केवल उम्मीदवार विशेष की होती है, परंतु उसे विजयी बनाने में छोटे नेताओं के आलावा चुनावी चंदा देने वाले, प्रचार करने वाले जैसे बहुतों का योगदान होता है।

3. सिनेमा के क्षेत्र में फिल्म को सफल बनाने में अगणित लोगों का योगदान होता है।

4. शिक्षा के क्षेत्र में परीक्षाफल बढ़ने का श्रेय अधिकारियों को मिलता है पर उसके लिए अध्यापकगण एवं अन्य कर्मचारियों का अमूल्य योगदान होता है।

5. किसी युद्ध को जीतने में सेनापति के अलावा बहुत से वीरों का योगदान होता है।

प्रश्न 3. संगतकार किन-किन रूपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं?

उत्तरः संगतकार विभिन्न रूपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं- जैसे

1. वे मुख्य गायक की भारी आवाज में अपनी सुंदर और कमजोर आवाज की गूंज मिलाकर गायन को प्रभावपूर्ण बना देते।

2. गायक जब अंतरे के जटिल जंगल में खो जाते हैं तो संगतकार ही स्थायी को सँभाले रखकर उनकी मदद करते हैं।

3. तारसप्तक गाते समय संगतकार उसके स्वर में स्वर मिलाकर उसे अकेले होने का अहसास नहीं होने देते हैंद्य

4. संगतकार मुख्य गायक के स्वर से अपना स्वर ऊँचा न करके उसकी सफलता में बाधक नहीं बनते हैं।

  • प्रश्न 4. भाव स्पष्ट कीजिए

और उसकी आवाज में जो एक हिचक साफ सुनाई देती है।

या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है।

उसे विफलता नहीं।

उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

उत्तरः उपर्युक्त पंक्तियों का भाव यह है कि संगतकार जान-बूझकर अपने स्वर को मुख्य गायक के स्वर से ऊँचा नहीं होने देते हैं। यह संगतकार द्वारा अपनी प्रतिभा का त्याग है जो योग्यता और सामर्थ्य होने पर भी मुख्य गायक की सफलता में बाधक नहीं बनता है और मानवता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है।

  • प्रश्न 5. किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाले लोगों को अनेक लोग तरह-तरह से अपना योगदान देते हैं। कोई एक उदाहरण देकर इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

उत्तरः किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्ध पाने वाले लोगों को अनेक लोग तरह-तरह से अपना योगदान देते हैं। उनकी सफलता में योगदान देने वाले बहुत से लोग होते हैं जो परदे के पीछे रह जाते हैं और प्रकाश में नहीं आ पाते हैं। इसका एक उदाहरण देखिए हमारे क्षेत्र के वर्तमान विधायक श्री नरेश शर्मा हैं। थोड़े दिनों पहले तक वे अत्यंत साधारण आदमी हुआ करते थे। उनके सद्व्यवहार से प्रेरित होकर लोगों ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया।

कुछ ने स्वेच्छा से तथा बीस लोगों की टीम ने उनके लिए चंदा एकत्र करना शुरू किया। युवा वर्ग ने स्वेच्छा से प्रचार का कार्य अपने जिम्मे सँभाल लिया। मुख्य बाजार के दो बड़े दुकानदारों ने पोस्टर, होर्डिंग्स और बैनर का खर्च उठाया। करीब बीस-पच्चीस लोग उनके साथ दिन-रात एक करके क्षेत्र में घूमते रहे और चुनाव होने तक साये की तरह उनके साथ रहे। आज इन सहयोगियों को कोई नहीं जानता है। श्री रमन शर्मा की गणना कर्मठ एवं ईमानदार विधायकों में की जाती है।

  • प्रश्न 6. कभी-कभी तारसप्तक की ऊँचाई पर पहुँचकर मुख्य गायक का स्वर बिखरता नजर आता है उस समय संगतकार उसे बिखरने से बचा लेता है। इस कथन के आलोक में संगतकार की विशेष भूमिका को स्पष्ट कीजिए।

उत्तरः तारसप्तक गाते समय स्वरों के उतार-चढ़ाव में जब मुख्य गायक की आवाज बैठने लगती है और उसकी आवाज कुछ गिरती हुई महसूस होती है तब संगतकार मुख्य गायक के स्वर में स्वर मिलाकर उसे सहारा देते हैं तथा उसको स्वर बिखरने से पहले ही सँभाल लेते हैं और उसके गायन की सफलता को विफलता में नहीं बदलने देते हैं। इस प्रकार मुख्य गायक की सफलता में संगतकार की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है।

  • प्रश्न 7. सफलता के चरम शिखर पर पहुँचने के दौरान यदि व्यक्ति लड़खड़ाता है तब उसे सहयोगी किस तरह सँभालते हैं?

उत्तरः सफलता के शीर्ष पर पहुँचकर जब कोई व्यक्ति अचानक लड़खड़ा जाता है तो उसके सहयोगी उसे साहस एवं हौंसला बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं। वे तन-मन से ही नहीं, आवश्यकता होने पर धन से भी उसकी सहायता करते हैं। वे उसे उसकी कमियों के प्रति सचेत करते हैं तथा दुबारा सफलता के शीर्ष पर पहुँचाने में मदद करते हैं।

रचना और अभिव्यक्ति

  • प्रश्न 8. कल्पना कीजिए कि आपको किसी संगीत या नृत्य समारोह का कार्यक्रम प्रस्तुत करना है लेकिन आपके सहयोगी कलाकार किसी कारणवश नहीं पहुँच पाए

(क) ऐसे में अपनी स्थिति का वर्णन कीजिए।

(ख) ऐसी परिस्थिति का आप कैसे सामना करेंगे?

उत्तरः-

(क) संगीत या नृत्य के कार्यक्रम में सहयोगी कलाकारों के  पहुँच पाने से मैं परेशान हो जाऊँगा। उनके न पहुँचने के कारणों का पता करूंगा। यथासंभव उन्हें बुलाने का प्रयास करूंगा। यदि वे नहीं आ सकेंगे तो मैं आयोजक को सारी बातें बताकर उनसे कहूँगा कि अपने स्तर से अन्य सहयोगी कलाकारों की व्यवस्था कराने का कष्ट करें ताकि मैं प्रस्तुति दे सकें।

(ख) ऐसी स्थिति का सामना करने के लिए मैं आयोजकों एवं श्रोताओं के सामने सारी बात साफ-साफ स्पष्ट कर दूंगा। और रिकार्डेड गीतों पर नृत्य प्रस्तुत करके बाँधे रखने का प्रयास करूंगा।

  • प्रश्न 9. आपके विद्यालय में मनाए जाने वाले सांस्कृतिक समारोह में मंच के पीछे काम करने वाले सहयोगियों की भूमिका पर एक अनुच्छेद लिखिए।

उत्तरः सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सफलता में सहायक लोगों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है। इनके सहयोग के बिना कार्यक्रम की सफलता की कल्पना करना भी बेमानी है। ये सहायक लोग ही कार्यक्रम के लिए आवश्यक वस्तुओं को एकत्र करते हैं, साज-सज्जा में विशेष योगदान देते हैं। वे अतिथियों के बैठने की व्यवस्था सँभालते हैं। मंच पर प्रकाश का उचित प्रबंध करते हैं। परदे के पीछे कुछ लोग रिकॉर्डिंग समय पर बजाकर कलाकारों की मदद करते हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करते हैं।

  • प्रश्न 10. किसी भी क्षेत्र में संगतकार की पंक्ति वाले लोग प्रतिभावान होते हुए भी मुख्य यो शीर्ष स्थान पर क्यों नहीं पहुँच पाते होंगे?

उत्तरः किसी भी क्षेत्र में संगतकार की पंक्ति वाले लोग प्रतिभावान होते हुए भी मुख्य या शीर्ष स्थान पर इसलिए नहीं पहुँच पाते है, क्योंकि

1. प्रतिभावान होकर भी वे मुख्य कलाकार से अलग होकर प्रस्तुति देने का हौंसला नहीं कर पाते हैं।

2. उन्हें शीर्ष स्थान पर पहुँचने तथा वहाँ बने रहने में संदेह रहता है। आर्थिक समस्याएँ उनके मार्ग में बाधक बनती हैं।

3. उनमें से कुछ लोग स्वयं को भाग्य के हवाले कर देते हैं कि किस्मत में होगा तो शीर्ष स्थान हासिल कर लेंगे।

4. ऐसे लोगों को उचित अवसर एवं सहयोग नहीं मिल पाता है।

Important Question & Answers

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. संगतकार किन्हें कहा जाता है?

उत्तरः संगतकार उन व्यक्तियों को कहा जाता है जो मुख्य गायक के सहायक होते हैं। वे मुख्य गायक के स्वर में स्वर मिलाकर उसके गायन को अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। वास्तव में संगतकारों के बिना मुख्य गायक की सफलता की कल्पना नहीं की जा सकती है।

प्रश्न 2. संगतकार कभी-कभी यूँ ही मुख्य गायक का साथ क्यों देता है?

उत्तरः संगतकार कभी-कभी यूँ ही मुख्य गायक का साथ इसलिए देता है क्योंकि मुख्य गायक को यह लगे कि वह अकेला नहीं है। उसका साथ देने के लिए संगतकार भी है। ऐसा करके वह मुख्य गायक के उत्साह को कम नहीं होने देता है।

प्रश्न 3. तारसप्तक गाते समय मुख्य गायक को क्या-क्या परेशानियाँ होती हैं?

उत्तरः तारसप्तक सात स्वरों का समूह होता है जिनकी ध्वनियाँ साधारण, मध्यम और मंद होती हैं। इन सुरों को ऊँचा-नीचा या मध्यम बनाए रखने के क्रम में मुख्य गायक की आवाज बैठने लगती है। उसका उत्साह कमजोर होने लगता है और उसकी आवाज से राख जैसा कुछ गिरता हुआ प्रतीत होता है।

प्रश्न 4. मुख्य गायक और संगतकार के संबंध एक-दूसरे के पूरक हैं। स्पष्ट कीजिए।

उत्तरः मुख्य गायक और संगतकार के मध्य अटूट संबंध होता है। संगतकार के बिना मुख्य गायक प्रसिद्ध के शिखर पर नहीं। पहुँच सकता है। संगतकार मुख्य गायक को कदम-कदम पर सँभालकर उसके गायन को प्रभावी बनाए रखता है। इसी तरह मुख्य गायक संगतकार को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करता है। इस तरह दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।

प्रश्न 5. संगतकार की मनुष्यता किसे कहा गया है। वह यह मनुष्यता कैसे बनाए रखता है?

उत्तरः संगतकार में योग्यता, प्रतिभा, क्षमता और अवसर होने पर भी वह अपनी आवाज को मुख्य गायक की आवाज से ऊँचा नहीं उठाता है तथा कभी भी अपनी गायिकी को मुख्य गायक के गायन से बेहतर सिद्ध करने का प्रयास नहीं करता है। इसे संगतकार की मनुष्यता कहा गया है। वह यह मनुष्यता मुख्य गायक को सम्मान देते हुए बनाए रखता है।

प्रश्न 6. लोग प्रायः संगतकार की विफलता किसे समझ बैठते हैं?

उत्तरः लोग देखते हैं कि मुख्य गायक की भारी भरकम आवाज के सम्मुख संगतकार की आवाज दबी रह जाती है। संगतकार चाहकर भी अपनी आवाज को ऊँचा नहीं उठा पाता है। इस प्रकार संगतकार सदा के लिए संगतकार या मुख्यगायक का सहायक बनकर रह जाता है। संगतकार द्वारा अपनी आवाज को न उठा पाने को लोग उसकी विफलता समझ बैठते हैं।

प्रश्न 7. वर्तमान में संगतकार जैसे व्यक्तियों की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तरः भूत, वर्तमान या भविष्य काल हो, संगतकार जैसे व्यक्तियों की प्रासंगिकता हर काल में रही है और रहेगी। संगतकार ही वह व्यक्ति होते हैं जो प्रसिद्ध या महान व्यक्तियों की सफलता में अपना अदृश्य योगदान देते हैं। ये लोग पर्दे के पीछे रहकर ऐसे व्यक्तियों की सफलता में विशिष्ट योगदान देते हैं। जैसे किसी अच्छे रेस्त्राँ के भोजन को स्वादिष्ट बनाने तथा उसे प्रसिद्ध दिलाने में बहुत से लोगों का योगदान होता है।

प्रश्न 8. ‘संगतकार’ कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तरः ‘संगतकार’ कविता उन व्यक्तियों के योगदान पर प्रकाश डालती है जो मुख्य व्यक्तियों की सफलता के लिए अपनी इच्छाओं की बलि चढ़ा देते हैं। मुख्य गायक का साथ देने वाले संगतकार उसके गायन को और भी सुंदर बनाते हैं तथा उसका उत्साह बनाए रखते हुए उसे अकेलेपन का अहसास नहीं होने देते हैं। ऐसे व्यक्ति प्रायः सभी क्षेत्रों नृत्य, संगीत, खेल, राजनीति, उत्सवों के आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान देते हुए देखे जा सकते हैं। ये लोग अपनी महत्त्वाकांक्षा का त्यागकर अपनी मनुष्यता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

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